किनारे….

किनारे अजीब शय होते हैं , उन पर मिलते हैं अंत और नयी शुरुआतें , ज़िन्दगी और मौत के बीच बस एक किनारे का ही तो फासला भर है। अंग्रेजी की एक कहावत है at the rope’s edge ,रस्सी के अंतिम छोर पर होना , एक किनारा वो भी है छोड़ देना आख़िरी उम्मीद और गिर पड़ना अनदेखे अनंत में ख़त्म होने के लिए। ऊंची इमारतों की छतों के किनारों पर हवा की आवाज़ें सुनाई देती हैं ,और धूप सुस्ताती है दो पल हर शाम खुदखुशी से पहले। धूप भी तन्हा है, और हवा भी लेकिन बस एक धोखा है साथ होने का। वक़्त ने लाद रखी है सब पर लम्हों की सलीबें , हाथ थामें, मुस्कराएँ , आँसू पोंछे बोले आई लव यू फिर भी सब की अपनी सलीबें हैं , दोनों के अपने-अपने तन्हा किनारे….

कल हम दोनों ने

एक पुल जलाया था

और एक दरिया के

किनारों की तरह नसीब बाँटे

बदन झटके

तो एक बदन की वीरानी

इस किनारे थी

और एक बदन की वीरानी

उस किनारे

#अमृता_प्रीतम

Advertisements