#गुलज़ार होना

 

अमृता को पढ़ा तो अमृता हुए
मीना के लफ़्ज़ों को अता किये नए माने
आसमान को ज़री की किनारी दी
पंजाबी के लफ़्ज़ों को ज़माने की आवाज़ दी

बूढ़े घिसे पिटे मोहब्बत है तुमसे को
न जाने कितने ही नए मिजाज़ दिए
मरहूम लफ़्ज़ों को खोल कर उनके जिस्मों में
नयी रूहें भरीं

शायरी को एक  नया घर दिलाया
अल्फ़ाज़ों को नयी ज़िंदगियाँ बख़्शी
और फिर भी बचाये रखी
अपनी आवाज़ की ख़राश
और आँखों की नमी

#गुलज़ार