मन

ये जो

खाली कोना है मन का

वक़्त कि संख्याओं से

न भरेगी इसकी शून्यता

कतरा-कतरा रात उड़ेले

अपनी यादें इसमें

या फ़िर दिन बुनना चाहे

रोशन नए सवेरे

मन खाली है ऐसा

इसमें अब कुछ भी

भर न पाए

कुछ ऐसा

जाने कब होगा कि

यह मन भर ही आये !

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Aapki Pratikriyaein

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