अमर प्रेम

ये वो ज़माने हैं जब लोगों को साँसे ख़त्म होने से ज़्यादा मोबाइल की बैटरी ख़त्म होने की चिंता है , एक मरते रिश्ते से ज़्यादा तवज्जो एक
पासवर्ड को मिलती है। जो कुछ नहीं कहते भूल गए हैं कि आँखों में सब लिखा है – नफरत /मोहब्बत , वफ़ा /बेवफाई।

मौसम बदलते हैं तो लौट भी तो आते हैं, मुश्किल है इसीलिए इनकी यादों का बटवारा। वो क्या था ” चिंगारी कोई भड़के “, याद से ज़्यादा ज़ालिम कोई चिंगारी है भला।

अमर प्रेम कैसा भी हो , पुष्प आई हेट टीयर्स कितनी बार भी दोहराओ ,आँखों के कोने ,मन के किनारे जब भीगे हों तो दुनिया धुंधली ही दिखती है !

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2 विचार “अमर प्रेम&rdquo पर;

Aapki Pratikriyaein

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