हसरतें ही हसरतें है ….

imagesCA30GDYOउसने कहा था वक़्त से बेहतर कोई तोहफा नहीं होता , तो क्या जिन कामों को ,लोगों को ,रिश्तों को हम वक़्त का तोहफा देना बंद कर देते हैं , वो हमारे लिए मायने खो चुके होते है ?

किसी ने लिखा था कोंट्रैल्स ( contrails) के बारे में – वो जो धुंए की लकीरें सी आसमान को बाँट देती हैं , धीरे -धीरे वो लकीरें भी मिट जाती हैं। किस ने लिखा था नाम याद नहीं , कभी चेहरे याद रहते हैं ,कभी नाम ,कभी सब कुछ ,कभी कुछ नहीं , मेमोरी मेरे साथ लुका -छिपी खेलती है

आज svetlana alexievich को नोबेल का ऐलान सुना , चेर्नोबील न्युक्लीअर हादसे पर उनकी लिखी पॉलीफोनिक किताब पढ़ने की इच्छा अब और भी तेज़ हो गयी है ,हालाँकि पुरस्कारों से भी उम्र के साथ -साथ  सम्मोहन ख़त्म हो चुका है लेकिन कुछ साल पहले यान मार्टल को पढ़ा था सिर्फ नोबेल के कारण और बहुत अच्छा लगा था।

कहानियाँ हमेशा ही मेरी कमज़ोरी हैं ,ख़ास कर वो जो औरतें बाँचती है।  जब पहली बार एकेडेमिक रिसर्च के लिए चुनना था एक विषय तो मैंने चुनी ऑस्ट्रेलियाई एबोरिजिनल औरतों की कहानियां , तब से दुनिया को देखने वाले मेरे लेंस बदल गए , हर हाशिए से पावर के केन्द्रों को देखने की आदत हो गयी

औरतों की कहानियाँ पसंद है मुझे ,उनमे सब है – कहा ,अनकहा ,बेवजह।  ऊन में ,कपड़ों में ,खाने में ,लफ़्ज़ों में ,चुप्पी में , मैली चादरों में , टूटे रिश्तों में , घरों में , वेश्यालयों में , धार्मिक जगहों में , अनुमतियों में , प्रतिबंधों में औरतों की कहानियां है

मर्दों की कहानियाँ भी तो औरतों की ही कहानियां हैं

और इसलिए मेरे वक़्त का तोहफा मैं कहानियों के नाम कर चुकी हूँ , मेरे कैलेंडर में सभी तारीखें भर गयी हैं

वक़्त कम है , मुलाकात हो न हो , हसरतें ही हसरतें है ….

 

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