एहसां

इतने लम्बे गिले ,इतनी कम ज़िन्दगी ,और फिर हरेक के दिल में मेरे लिए शिकायतों के सैंकड़ों कंकड़। उफ़ ये बोझ , ये उलझनें , काश लफ़्ज़ों के दरिया में डुबोये जा सकती तन्हाई……..

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई , जैसे एहसां उतारता है कोई

भुला सका न ये सिलसिला जो था ही नहीं

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2 विचार “एहसां&rdquo पर;

Aapki Pratikriyaein

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