प्रेमचंद कभी नहीं मर सकते…….

 

जब पढ़ना सीखा और समझ आया रीडिंग पसंद है तो अधिकतर किताबें घर और स्कूल दोनों में अंग्रेजी में थी। हिंदी टीचर मम्मी ने पहली हिंदी किताब जो लगभग ज़बरदस्ती पढ़वाई थी वो थीं प्रेमचंद की दो कहानियाँ – ईदगाह और दो बैलों की कथा।

#ईदगाह मैं आज भी हर ईद पर पढ़ती हूँ , ताकि याद रहे हर त्यौहार का मतलब , बहुत सालों तक सब बैल हीरा -मोती रहे और प्रेमचंद दिल के बहुत क़रीब।

कुछ महीने पहले जब मेरे हिंदी ब्लॉग पार्श्व स्वर को हिंदी ब्लॉगिंग का Orange Flower Award मिला तो माँ के लिए अच्छा लगा , उनकी अंग्रेजी वाली बेटी का हिंदी ब्लॉग लोग पढ़ते हैं, पसंद करते हैं , अवार्ड देते हैं , ये उनकी उपलब्धि थी की जिस बेटी की सारी पढ़ाई अंग्रेजी में थी, जिसकी सारी डिग्री अंग्रेजी भाषा और साहित्य में थी वो लड़की हिंदी पढ़ रही थी , लिख रही थी , सीख रही थी हर रोज़ अब भी और उनसे भी ज़्यादा शायद प्रेमचंद की क्योंकि #कफ़न जब भी पड़ी समझा लफ्ज़ और जज़्बात के बीच का पुल बनाना

हिंदी के साथ सफर में प्रेमचंद हमेशा रहे, चाहे बड़े भाईसाहब की थिएटर परफॉरमेंस हों , या पूस की रात की जर्मन अडॉप्टेशन। ठाकुर का कुआँ पढ़ी तो पहली बार शायद समझा जाति और दलित का मतलब और दर्द। चाहे अक्सर, अधिकतर अंग्रेजी है मेरी भाषा पर उसमे में प्रेमचंद की आवाज़ उनकी छाप बाकी है।

मेरी बेटी को भी हिंदी मेरी माँ ने सिखाई, इस अंग्रेजी, जर्मन , स्पेनिश ,पंजाबी और भी जाने क्या क्या पढ़ने वाली बच्ची ने भी पहली हिंदी कहानी ईदगाह पढ़ी।

#प्रेमचंद इसीलिए लिए कभी नहीं मर सकते , वो रूह लिखते थे , भाषा एक बहुत छोटी दीवार है जब-जब जज़्बात कागज़ पर शक्ल लेते हैं प्रेमचंद बार बार लौट आते हैं ………….

#remembering #PremChand #Hindi #Literature

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4 विचार “प्रेमचंद कभी नहीं मर सकते…….&rdquo पर;

Aapki Pratikriyaein

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