Hiraeth

जैसे हर मुलाक़ात तय है , वैसे ही तय हैं अलविदा हरेक। कभी कहीं इस असीम कॉसमॉस में मिलते हैं ,घुलते है जिस्म, रूह, कहानियाँ , बनते हैं एक दुसरे के सबप्लॉट और फिर लौट जाते हैं अपनी -अपनी कहानी में। अपने दुःख में मुश्क़िल होता है किसी और की ख़ुशी महसूस करना , किसी के दुःख में अपनी ख़ुशी जताना बुरी आदत होती है – इंसान कितने कॉम्प्लिकेटेड होते हैं और उस पर करते हैं इश्क़ , नफरत , मोहब्बत ,इबादत ,वफ़ा ,बेरुखी ……
हिराएथ वेल्श लफ्ज़ है ,मतलब इस शार्ट फिल्म में देखिये …… यही सफर है
यही अलविदा है
जान, जाना तय है , लौटना अक़्सर मुमकिन नहीं होता
सबके सफर कायम रहे , सबकी कहानियां क़ामिल…..

Khamakhah