पिंजरा,पंछी,हवा

दाग अच्छे हैं , चोट ,ठोकर जितना सिखा देती है उतना ख़ुशी का हौसला कहाँ। मैं हमेशा कहती हूँ हमेशा कुछ नहीं रहता , इसलिए तेज़ बुखार से पैदा हुए भ्रम भी भूलना नहीं चाहती। धोखे भी अच्छे हैं , तस्वीरें और लफ्ज़ जैसे चाहे इस्तेमाल किये जा सकते है मगर रूह की आवाज़ को मॉर्फ़ करना या आँखों के झूठ को फोटोशॉप करना  मुमकिन नहीं।

बना रहे दुनिया का भरम कि जो अच्छे है वो अच्छे ही हैं, किसी को तो बुरा साबित होना ही होगा अच्छों की अच्छाई बचाने के लिए। रंजिश कैसी और ग़म क्यों ? मैंने कहा था न , न पिंजरा बनना , न पंछी , हवा हो हवा ही रहना , जीने के लिए ज़रूरी और इनविज़िबल !

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