उदासियों का मौसम

ये शहर एक लम्बा उपन्यास है , इसके लाखों सब-प्लाट है , जो कब शुरू हुए ,कब खत्म कोई हिसाब नहीं। ये एक लड़ाई का मैदान है जिसने मरने वालों की गिनती छोड़ दी है। सर्दियाँ उदासियों का मौसम हैं , मेट्रो के पुलों के नीचे , फ्लाईओवरों की ओट में ही नहीं, पेन्टहोउसों और आलीशान अपार्टमेंट्स में भी छुपी हैं अवसाद से भरी अभाव की कहानियाँ।

रूहों की तन्हाइयां , दिलों की खलिश, ज़ेहन के अँधेरे बिजली की रोशनियों से ,बाजार की चीज़ों से भरे हैं कभी। दूरियां हमेशा नाप सके ऐसी इंसानों की औकात कहाँ , कुछ ज़िन्दगी से लम्बी ,वजूद से भारी