इकारस और सिसीफस

“In the dark times
Will there also be singing?
Yes, there will also be singing.
About the dark times.”

― Bertolt Brecht

ब्रेख़्त बोले थे बुरे दिनों में बुरे दिनों के गीत गए जायेंगे

जो लिखते हैं लिखना उनकी मजबूरी है क्यूंकि लफ्ज़ बहुत ज़िद्दी होते हैं , जो गाते हैं वो दर्द भी गाते ही हैं क्यूंकि और किसी तरह का जताना उन्हें नहीं आता। मैं इकारस* हूँ मुझे उड़ना था किसी भी कीमत पर , पंख तो मांस-मज्जा वाले भी एक दिन टूट ही जाते हैं , मेरे लफ़्ज़ों के पँखों से मुझे एक उड़ान तो मिली , जानती हूँ मोम के पंख कब तक रहेंगे मगर फिर भी , हमेशा की किसी उम्मीद के बिना मैंने इश्क़ समझना सीखा, रूह लिखना क़ुबूल किया , क्यूंकि हमेशा तो कुछ भी नहीं रहता।

यूनानी सभ्यता वालों से पर कुछ गहरा नाता लगता है , कभी कभी ये इकारस मन , सिसीफस** भी हो जाता है , रोज़ धकेलता है वुजूद का पत्थर ज़िन्दगी की चोटी तक और रोज़ इंतज़ार उसके ही नीचे दब मरने का , मानना चाहता है उनकी बात जो कहते हैं दुनिया अभी भी खूबसूरत है। शायर इश्क़ लिखते हैं , इबादत की बेवजह बातें करते हैं , अमलतास के ख़्वाब देखते हैं इसीलिए दुनिया शायद बची हुई है।

इंक़लाब सिर्फ़ हुकूमतों के खिलाफ नहीं होते , कुछ छोटी -छोटी बगावतें हम रोज़ करते हैं खुद से खुद के ख़िलाफ़ , कभी जिस्म , कभी रूह से लड़ते हैं , हारते हैं और खुद ही मरहम -पट्टी कर फिर लौट आते हैं ज़िन्दगी का मोर्चा सँभालने , मुश्किल तो है लड़ना जिस जंग में शिक़स्त लाज़मी है और तन्हाई मुक़द्दर 

ये रूह-ए -महबूब न जीने देती है, न मरने देती है ,तब तक हम अंधेरों में हिज्र के गाने गाएंगे

किसी की रेशम आवाज़ में उड़ते हुए डूब जाना , आज का इश्क़

“कब बिछड़ जाए हमसफ़र ही तो है
कब बदल जाये इक नज़र ही तो है”

 

*In Greek mythology, Icarus is the son of the master craftsman Daedalus. Often depicted in art, Icarus and his father attempt to escape from Crete by means of wings that his father constructed from feathers and wax. Icarus’ father warns him first of complacency and then of hubris, asking that he fly neither too low nor too high, so the sea’s dampness would not clog his wings or the sun’s heat melt them. Icarus ignored his father’s instructions not to fly too close to the sun; when the wax in his wings melted he tumbled out of the sky and fell into the sea where he drowned.
** In Greek mythology Sisyphus was the king of Ephyra . He was punished for his self-aggrandizing craftiness and deceitfulness by being forced to roll an immense boulder up a hill, only to watch it come back to hit him, repeating this action for eternity. Through the classical influence on modern culture, tasks that are both laborious and futile are therefore described as Sisyphean.

 

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