नोट्स फ्रॉम चिकुनगुन्या

fever1

 

बुख़ार
दुनिया में रहते हुए
उसे दूर से देखने का
जादू

ज़बान से बोलने
की ताक़त
न हो तब भी
रूह की कड़वाहट
ज़बान ही जानती है

एंटी -बायोटिक
क्या कमाल चीज़ है
काश रूह की बेज़ारगी
का भी ढूंढें
ऐसा ही इलाज कोई

दर्द और दवा
मिलकर एक अजीब नशा
सारी दुनिया गुलाबी
सारा जहाँ बेमानी

जिस्म की बग़ावत है
सिर्फ मर्ज़ मत समझो इसे
ये जो इंक़लाबी हैं
बहुत सरफिरे होते हैं

यादों के बीच
उड़ रही हूँ
टूट रही हूँ
जुड़ रही हूँ
डॉक्टर ,दुनिया
सिर्फ बुख़ार समझती है

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