बुद्ध

मैंने आज बुद्ध देखे
निजामुद्दीन की गलियों में इत्र बिखेरते
कैंटरबरी के प्राचीन गिरिजे मे मोमबत्ती जलाते
बनारस में गंगा को चुपचाप तकते
मक्लोडगंज मे धौलाधार को तठस्थ देखते

और अभी -अभी
बुद्ध आकर मुझसे बोले
चलो बाहर चले
तितलियाँ देखें
चींटियों से बातें करें !