भी

 

लफ्ज़ मरहम भी
हुआ करते थे
लफ्ज़ वक़्त ने
तराश कर
नश्तर भी किये
 
ख़ामोशी सुकून भी
लाती थी कभी
ख़ामोशी से
ज़हन में कभी
नासूर हुए
 
हमेशा का वहम
इश्क़ था कभी
हमेशा हम न हुए
तुम न हुए