चाँद

perigee

इस चाँद के
हज़ार महबूब हैं
विलाप करते भेड़िये
तन्हा ज्वारभाटे
और टूटे दिलों का
मरहम खोजते
मायूस आशिक़

लेकिन चाँद
का मुक़द्दर है
दीवानों की तरह
मिट-मिट के जीना
जी-जी के मरना

मुकम्मल हो के भी
रहना अधूरा
और अधूरेपन में भी
मुक़म्मल रहना