शुभ विवाह ! #MaritalRape

 

rape

एक दिखावे वाले बड़े समारोह में
पिता “दान” करते हैं कन्या
सौंपना सम्पति का
एक मालिक का
नए मालिक को

बेगार , घर , दफ्तर
और बिस्तर पर भी
कलम, आवाज़ ,समझ
सब दहलीज़ के
बाहर उतारने होंगे रोज़

बराबरी इंसानों में होती हो
औरत की आदमी से
कैसी बराबरी
ज्यूँ -ज्यूँ प्यार बढ़ेगा
सवाल घटते जायेंगे
माएँ यही राज़ सिखाती हैं न ?

मंदिरों में अटल सुहाग गातीं
पार्लरों में जवान खूबसूरत
लगने की कोशिश
एक ही तो है
जिस्म को रखना उसके लिए सुन्दर
और आत्मा को पवित्र
जो रख सके निर्जल व्रत
और गाए उनके धर्म के गुणगान

“तन-मन-धन सब कुछ है तेरा”
यही सही लाइन है
सपने, इच्छा ,मर्ज़ी
सब उसकी
कोख़,संतति भी उसकी
वो कहते तो हैं
– सब कुछ तुम्हारा ही तो है
बेटों की माँ !

रोज़ जब वो लेने आये
अपना हक़ तुम्हारे जिस्म से
तो भिंची मुट्ठियों में
छुपा लेना
परिवार का मान
और दबी चीखों में भी
गलती से भी
न कहना
बलात्कार

शुभ विवाह !

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