घर

IMG_9023
घर सिर्फ जगह होते
तो अच्छा होता
सिर्फ फर्नीचर ,किताबें ,कपड़े -बर्तन
कागज़ ,लोहा ,लकड़ी होते
तो आसान होता
उनका बिखरना
किसी बेख्याल
ज़लज़ले में
घर कद्दूकस ,चम्मच ,
मर्तबान, कप,प्लेट ,केतली
घर अलमारियाँ, खिलौने
परदे ,चद्दरें ,गद्दियाँ
घर दवाईयाँ ,मलहम ,
कंघियाँ ,शीशे , घड़ियाँ
और न जाने
कौन कौन सा
अतीत और वर्तमान होते हैं
पर घर खुशबु होते हैं
पुरानी किताबों की
ग्रीन टी और बिरयानी की
बेतरतीब बिखरी हुई
यादों की मिठास होते हैं
और दिल को सालती हुई
तकरारों की आंच होते हैं
घर जिस्म होते हैं
जिन्हें हम सहेजते ,सम्भालते हैं
जाने कितने जतन से सजाते हैं
अपने रूह के रेशम के रेशों से
घर जवाब होते हैं
दुनिया भर के सवालों के
घर एक पता ,कुछ दीवारें
चंद खिड़कियाँ ही बन पाते काश
पर घर ज़मीन होते हैं
आसमान होते हैं
उन दोनों को जोड़ने वाले
इंद्रधनुष की कमान होते हैं
घर कभी पिंजरा
कभी उड़ान होते हैं
घर लम्हों की ईंटें
जोड़-जोड़ कर
रखी हुई वक़्त की
मज़बूत दीवार होते हैं
लेकिन जब
भरभरा के गिरते हैं तो
जैसे ज़िन्दगी के लहर में
डूबता हुआ
एक छोटा सा संसार होते हैं
घर , कभी सोचना
घर नहीं होते
घर इंसान होते हैं