1984

 

सरकारी आंकड़ों की मानो

न ही कहीं दंगा हुआ

न गले में टायर डाल

धूं -धूं कोई जलाये  गए

 

न किसी भीड़ को

भड़काया गया

न ही सैंकड़ो

काटे-मारे गए

 

कौन सी औरतों का

बताओ बलात्कार हुआ

कौन से बच्चे

झुलसाये गए

 

“बस एक बड़ा

पेड़ गिरा तो

आस-पास की धरती

काँप गयी “

 

ये कौन हैं

3 0  सालों से जो

चीखते-चिल्लाते हैं

जो इन्साफ मांगते हैं

 

इतना भी नहीं जानते हैं

हम सिर्फ सरकारी

आंकड़ों को मानते हैं !