कोई शाम और शामों से कुछ ज़्यादा उदास होती है। अक्सर चमक- दमक में दिल का कोई कोना कुछ और अँधेरा लगने लगता है। अक्सर बाहर के शोर में रूह की आवाज़ें और परेशान करने लगती हैं। सुकून रोशनी नहीं है तो क्या है , चैन चुप्पी नहीं है तो लफ्ज़ भी नहीं है। मैं मैं नहीं हूँ तो कौन हूँ ?

Advertisements