इश्क़ एक तावीज़ है……

 

रिश्ते कभी घड़ी भर की मुलाक़ातों से छोटे पड़ जाते हैं , जन्म -जन्म कुछ होता ही नहीं , बस लम्हे ही सच हैं , मुख़्तसर चंद लम्हे ,जीते ही मर जाने वाले, लेकिन दुनिया को चाहिए “हमेशा के लिए” , जो खुद हमेशा नहीं रहते उन्हें हमेशा चाहिए ……..

लफ़्ज़ों की रूहें देखीं हैं कभी ? होती हैं ,भटकती भी रहती हैं उनके कहे /लिखे जाने के बाद। अपनी आँखें देखना कभी किसी साफ़ आईने में ,लफ़्ज़ों की रूहें दिखाई देंगी , जो कहे ,जो नहीं कहे ,जो भुला दिए गए ……

इश्क़ एक तावीज़ है रूह का , सारी बलाएँ शायद न ले पाए पर एक दुआ का एहसास है, मुसलसल

इश्क़ आसमाँ का नीला है , एक रूह पर दूसरी रूह की फीकी पर न मिट सकने वाली ग़ैर -सरकारी मोहर

हम अपनी रूह तेरे जिस्म में छोड़ आये फ़राज़
तुझे गले से लगाना तो एक बहाना था

 

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