तुमने लिखा है….

तुम्हारी हर छुअन में
हज़ारों अल्फाज़ रहते हैं
तुम्हारे जाने के बाद जो
मेरे जिस्म में बहते हैं

यहाँ माथे की लकीरों
के बीचोंबीच देखो
जुदाई लिखा है

और आँखों के
गीले केनवेस पर
ख्वाब बिखरे हैं
होठों पर
हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी…..

वहाँ दिल पर
लफ्ज़ नहीं है
पर हज़ारों रंगों वाली
बेचैनी के दस्तख़त हैं

मेरी पीठ पर
तुम्हारी उँगलियों से
तराशा हुआ इश्क़
दास्तानें कहता है
मेरे बाज़ुओं में तुमने
इंतज़ार लिखा है

वो जो रूह की दरारें
पिघले सोने से भरते हैं
मेरे अंदर उन किंतुनसुकी
का तुमने राज़ लिखा है

मैं थक जाती हूँ अक्सर
जीने की अदा
ढोते-ढोते

पर मेरे तलवों में
तुम तक ये सफर
तुमने ही तो
हर बार लिखा है