मिथ्या

ऐसा क्या था

जो मिथ्या था

भ्रम था सारा

या ज़रा सत्य था

शब्दों से ही

गर जानोगे

सच-झूठ की

सब गहराई

प्यार लगेगा

एक परछाई

और सारा जीवन

बस मिथ्या !

Read this in English.

Advertisements