मेरा दिल एक रेडियो

“We’re stronger in the places that we’ve been broken.” —Ernest Hemingway

शायद हाँ ,शायद नहीं।  जहाँ टूटते हैं वहां क्या सब नया उग आता है ,दिल छिपकली तो नहीं , पर जहाँ टूटता है वहीँ किन्तुसुकी बर्तनों जैसे वक़्त और तजुर्बे का सोने जैसे अनमोल जोड़ लग जाता है। दिल की बनावट ज़रूर पेचीदा होती है , कहा था किसी ने।  कभी सोचती हूँ दिल सिर्फ खून और मांसपेशियों से तो नहीं बना हो सकता।  दिल के रेशे रेशम जैसे चमकीले होते होंगे और नए सूत जैसे नाज़ुक, या फिर काफ्का के फलसफों जैसे पेचीदा मगर रूमी के ज़िक्र जैसे आसान।

मेरा दिल सुर्ख लाल तो बिलकुल नहीं होगा, काला भी नहीं – काले तो ताबूत होते हैं। मेरा दिल होगा एक अजीब सा शिमला की धुंध वाला ग्रे। क्या सैंकड़ों चींटियों की कतार से जब कोई एक खो जाती है तो बाक़ी चींटियाँ उसे खोजती होंगी, अबोले ,अजान चींटियों जैसे इंसान कभी हो पाएंगे ?
सब कुछ ऑनलाइन बिक रहा है – बुद्ध , बुद्धि ,शांति
आज सुबह ट्विटर ने बताया आज वर्ल्ड रेडियो डे है। रेडियो मेरा पुराना इश्क़ है ,रेडियो से जब पहली बार सुनी थी अपनी आवाज़ ,तब समझा था १०४. ८३ मीटर पर मीडियम वेव वाला जादू।  आवाज़ के जादू और लफ़्ज़ों के सारे जादूगरों से तब से रिश्ता है।
मेरा दिल एक रेडियो है और उसके फरमाइशी प्रोग्राम पर अक्सर बजता है :

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