रावण और हीथक्लीफ़

ravan

“Until the lions have their own historians, the history of the hunt will always glorify the hunter.”― Chinua Achebe

बचपन की एक याद
हर साल दशहरे पर
दोस्तों के साथ रावण बनाना
ऐसा कोई लंका के राजा
जैसा भव्य या विशाल नहीं
या बड़ी बड़ी रामलीलाओं
जैसा अहंकार का परिचायक नहीं
पुराने कपड़ों, अख़बारों
गत्ते ,भूसे से भरा
हमीं जैसा
हमसे बस थोड़ा ही ऊँचा रावण
जब धूं -धूं जलता रावण
तो नानी बांटती बताशे
सब नाचते
मुझे शायद तब से ही
घृणा थी हिंसा से
जब तक समझा
महाकाव्यों को सिर्फ कथा
तब रावण से नफ़रत
बाकी नहीं बची
हीथक्लीफ़* से प्यार हुआ
रावण तब से है
बाकी सभी महाकाव्यों
के नायक जैसे
वीर, ज्ञानी, प्रसिद्ध
परंतु किसी न किसी
दोष से ग्रसित
क्या राम सदा ही रहे न्यायप्रिय ?
क्या अर्जुन से नहीं हुई कोई भी भूल ?
कुछ एक के महिमागान को
अर्थपूर्ण बनाने के लिए
कुछ को
बना दिया गया
अविश्वसनीय दुष्ट
दस सिर , अनगिनित भुजाएं
नारी का वस्त्रहरण करने वाला
उनका क्या जिन्होंने पत्नी से मांगी अग्नि परीक्षा
चाहते थे जो देखना चरित्र का पहला प्रमाण पत्र
उनका क्या जो दांव पर खेल आये उसे
क्या ये पाप कम थे ?
अब वो सब
बस प्रतीक हैं
कभी पाखंड के, अधर्म के
और अधिकतर अंदर चलने वाले
नियामत द्वंद्व के
* एमिली ब्रोंटे के प्रसिद्ध उपन्यास  Wuthering Heights से