रंग

 

रंग खुसरो की
इबादत से भी पाक
मोहब्बत है
फ़ना होके भी रहना अपने
महबूब -ए -इलाही से रूबरू

रंग मोहब्बत है
जो भरता है गुलों में
बहार की जुस्तजू
और साँसों में
ज़िंदा होने की तपिश

रंग एक गैर मौजूदगी है
वृन्दावन के अँधेरे
कमरों में ,गलियों में
जहाँ परंपरा की
जीवित -मृत गठरियाँ
जोहती हैं मोक्ष

रंग लाल ,पीला ,हरा
ही तो नहीं
रंग अँधेरे का काला भी है
और नूर का सफ़ेद भी

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